बेलडांगा हिंसा: झारखंडी श्रमिक की मौत के बाद महिला पत्रकार सोमा मैती पर हमला, पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल
मुर्शिदाबाद: झारखंड में एक बंगाली प्रवासी श्रमिक की मौत को लेकर मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में हालात तनावपूर्ण हो गए। मृतक के परिवार का आरोप है कि उसे केवल बंगाली बोलने के कारण पीट-पीट कर मारा गया। इस घटना की रिपोर्टिंग करने गई पत्रकार सोमा मैती पर एक समूह ने सड़क पर हमला किया और उन्हें बुरी तरह से पीटा।
घटना के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की कोई पहल नहीं हुई।
विश्लेषकों का कहना है कि पत्रकार समाज के ‘चौकीदार’ हैं और उन्हें राजनीतिक दबाव और धमकियों के बावजूद अपने पेशे का पालन करना पड़ता है। कई बार सरकारें या सत्ता पक्ष पत्रकारों की आलोचना दबाने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका काम रोक नहीं पाते।
देशभर में राजनीतिक दलों के विरोध या आलोचना करने पर पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में सिद्दिक कप्पान, पन्ना प्रसून बाजपेयी और अभिसार शर्मा जैसी घटनाएं इसका उदाहरण हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पत्रकारों की सुरक्षा और उनके पेशेवर सम्मान की रक्षा के लिए पत्रकारों को खुद एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। वित्तीय असुरक्षा और राजनीतिक दबाव के बावजूद पत्रकारिता की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी है, नहीं तो बार-बार ऐसे हमले होते रहेंगे।
बेलडांगा हिंसा: झारखंडी श्रमिक की मौत के बाद महिला पत्रकार सोमा मैती पर हमला, पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सवाल
Reviewed by Bengal Media
on
January 17, 2026
Rating:
Reviewed by Bengal Media
on
January 17, 2026
Rating:

No comments: