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बेलडांगा हिंसा: रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार सोमा मैती पर हमला, भाजपा ने ममता सरकार और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल

मुर्शिदाबाद- पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हिंसक प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार और उनके कैमरापर्सन पर हमले की घटना सामने आई है। कोलकाता की एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थान की महिला पत्रकार सोमा मैती गंभीर रूप से घायल हो गईं और फिलहाल अस्पताल में इलाजरत हैं।
जानकारी के अनुसार,झारखंड में एक फेरीवाले की बेरहमी से पिटाई के बाद गंभीर हालत में उसे मुर्शिदाबाद लाया गया। इसके विरोध में स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस को सड़क पर खड़ा कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। शुक्रवार को बेलडांगा में सड़क जाम के साथ-साथ रेलवे ट्रैक पर भी प्रदर्शन हुआ, जिससे सड़क और रेल यातायात पूरी तरह ठप हो गया और हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।
इसी घटना की रिपोर्टिंग करने पहुंचीं पत्रकार सोमा मैती पर अचानक प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके बाल पकड़कर मारपीट की। किसी तरह जान बचाकर वे मौके से निकलीं और अस्पताल पहुंचीं। इस घटना के बाद विभिन्न वर्गों ने कड़ी निंदा की है। मीडिया कर्मियों ने भी विरोध दर्ज कराया है।
शनिवार दोपहर कांकसा के बसकोपा इलाके में एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा की राज्य महासचिव लॉकेट चटर्जी ने घटना की तीखी निंदा की। इस मौके पर दुर्गापुर पश्चिम के विधायक लक्ष्मण घड़ुई, दुर्गापुर पूर्व के नेता संतोष मुखर्जी, पश्चिम बर्दवान जिला भाजपा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर बनर्जी सहित अन्य नेता मौजूद थे।
इस दौरान लॉकेट चटर्जी ने कहा कि पत्रकार का काम खबर जुटाना है और उसी कर्तव्य का पालन करते समय सोमा मैती पर हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के वक्त पुलिस मूकदर्शक बनी रही। मदद मांगने के बावजूद पुलिस ने कोई सहायता नहीं की, न ही सुरक्षित निकलने के लिए वाहन की व्यवस्था की गई। टोटो से निकलने की कोशिश करने पर चालक को भी धमकाया गया।
उन्होंने दावा किया कि शनिवार को भी दो पत्रकार—कौशिक घोष और पलाश मंडल, तथा एक कैमरापर्सन केष्ट दत्त पर हमला हुआ। बेलडांगा में लगातार पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर सवाल उठाते हुए लॉकेट चटर्जी ने कहा कि पत्रकारों को सुरक्षा देने के बजाय उन्हें दूर से तस्वीरें लेने की सलाह दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी घटना एक साजिश के तहत कराई गई है, जिसके चलते उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच संपर्क टूट गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले CAA और अब वक्फ बिल के नाम पर हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, ट्रेनों पर पथराव, टिकट काउंटरों में तोड़फोड़ और लूट की घटनाएं हुईं, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही। महिला पत्रकार पर हमले के बावजूद सत्तारूढ़ दल की ओर से कोई विरोध नहीं दिखा।
लॉकेट चटर्जी ने मांग की कि पत्रकारों पर हमले के दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस को कार्रवाई में 30 घंटे क्यों लगे, जबकि प्रदर्शनकारियों के पास लाठी-डंडे और हथियार थे।
इस दौरान उन्होंने डीएलओ अशोक दास की मौत का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने कहा कि बीएलओ पर तृणमूल के दबाव में अवैध घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के नाम न काटने का दबाव डाला जा रहा है।
लॉकेट चटर्जी ने कहा कि बेलडांगा में जब हालात जल रहे हैं, तब तृणमूल कांग्रेस के नेता अलग-अलग जगहों पर सभाएं कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह सब एक बड़ी साजिश का हिस्सा है और आने वाले चुनाव में तृणमूल को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
बेलडांगा हिंसा: रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार सोमा मैती पर हमला, भाजपा ने ममता सरकार और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल बेलडांगा हिंसा: रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकार सोमा मैती पर हमला, भाजपा ने ममता सरकार और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल Reviewed by Bengal Media on January 17, 2026 Rating: 5

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