पानागढ़ रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान RPF जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पानागढ़: पश्चिम बंगाल के पानागढ़ रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के एक कर्मचारी ने ड्यूटी के दौरान ट्रेन की पटरी पर सिर लटकाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना रात लगभग 10 बजे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक के पास हुई, जिससे पूरे रेलवे परिसर में हड़कंप मच गया।
मृतक की पहचान अरुण कुमार सिंह (55 वर्ष) के रूप में हुई है। वह बिहार के निवासी बताए जा रहे है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक हुई इस घटना से यात्रियों और स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों में भय और शोक का माहौल बन गया। रेलवे जैसे अत्यंत संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में इस तरह की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब यह एक सुरक्षा बल के जवान से जुड़ी हो।
घटना की सूचना मिलते ही पानागढ़ स्टेशन पर तैनात RPF कर्मियों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया और क्षेत्र को घेर लिया, ताकि किसी तरह की अफवाह या अव्यवस्था न फैले। कुछ ही देर में RPF के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे मामले का जायजा लिया। इसके बाद सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) को सूचना दी गई। GRP की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे जाने की तैयारी की गई, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। हालांकि प्रारंभिक तौर पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
अब तक इस घटना के पीछे की वजह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। मृतक RPF कर्मचारी ने ऐसा कदम क्यों उठाया, इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। यह भी सामने नहीं आ सका है कि वह किसी मानसिक तनाव, पारिवारिक समस्या या ड्यूटी से जुड़े दबाव से गुजर रहा था या नहीं। सूत्रों के अनुसार, ड्यूटी के दौरान हुई इस मौत को लेकर RPF के कर्मचारी और अधिकारी इस समय कुछ भी कहने से बच रहे हैं। RPF की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। वहीं, सहकर्मी भी इस घटना से स्तब्ध हैं और खुले तौर पर कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं।
इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा बलों में कार्यरत कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य दबाव को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। RPF जवानों की ड्यूटी न केवल शारीरिक रूप से थकाऊ होती है, बल्कि मानसिक रूप से भी काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। लंबी ड्यूटी, अनियमित समय, यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी और कई बार तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटना, इन सभी का असर कर्मचारियों के मानसिक संतुलन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल जांच तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि क्या कर्मचारियों को पर्याप्त मानसिक सहयोग और परामर्श सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं। यदि समय रहते ऐसे पहलुओं पर ध्यान न दिया गया, तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल GRP पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत के कारणों पर कुछ स्पष्टता आ सके। रेलवे प्रशासन और RPF के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी अब यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस घटना को गंभीरता से लें और पारदर्शी तरीके से जांच कराएं। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि रेलवे सुरक्षा बल में कार्यरत कर्मचारियों के कार्य वातावरण, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर ठोस कदम उठाए जाएं। पानागढ़ स्टेशन पर हुई यह दुखद घटना न केवल एक जवान की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी भी है कि सुरक्षा के साथ-साथ सुरक्षा देने वालों की मानसिक स्थिति का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है।
पानागढ़ रेलवे स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान RPF जवान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
Reviewed by Bengal Media
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January 08, 2026
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