रानीगंज में 100 वर्षों से जीवित है हरि कीर्तन की परंपरा, बैसाख माह में भक्ति से गूंज उठा सस्टीगोड़िया बाध्यकर पाड़ा
रानीगंज : आस्था और भक्ति की परंपरा आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। रानीगंज के सस्टीगोड़िया बाध्यकर पाड़ा में बैसाख माह के दौरान चंद्र भानू उदय समिति की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भव्य हरि कीर्तन का आयोजन किया गया। विभिन्न वाद्य यंत्रों, ढोल, मंजीरा और करताल की मधुर ध्वनि के साथ पूरी बस्ती हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हो उठी।
बताया गया कि यह हरि कीर्तन करीब 100 वर्षों से लगातार आयोजित होता आ रहा है। स्थानीय लोग भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति को जीवित रखने तथा गौरांग महाप्रभु और निताई के बताए मार्ग पर चलने के उद्देश्य से पूरे बैसाख माह तक हरि नाम संकीर्तन करते हैं।
बैसाख माह में हरि कीर्तन को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक आयोजन माना जाता है। खासकर ग्रामीण और बंगाली समुदाय के लोग इस महीने मंदिरों में पूजा-अर्चना, दान और रात्रि भर हरिनाम संकीर्तन में भाग लेते हैं। शाम होते ही कीर्तन मंडलियां विभिन्न मंदिरों और गलियों में घूम-घूमकर भगवान का नाम जपती हैं। श्रद्धालु अपने घरों को सजाकर मंडलियों का स्वागत करते हैं और हरिभोग व प्रसाद का वितरण करते हैं।
पूरे बैसाख माह तक शहर के विभिन्न टोलों में गूंजने वाला यह हरि कीर्तन शनिवार की रात अखंड कीर्तन के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर अष्टमंगला खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
इस दौरान समाजसेवी पंकज सतनालिका की ओर से हरि कीर्तन में शामिल श्रद्धालुओं के लिए जलपान सेवा शिविर लगाया गया। कार्यक्रम में पंकज सतनालिका, राजू बाध्यकर, विद्युत बाध्यकर, मधुबाला बाध्यकर, झूमा बाध्यकर, चित्रा बाध्यकर, ओनीमा बाध्यकर सहित बाध्यकर समाज के अनेक लोग उपस्थित रहे।
राजू बाध्यकर ने बताया कि चंद्र भानू उदय समिति की ओर से पहला बैसाख से शुरू होकर पूरे बैसाख माह तक हरि कीर्तन का आयोजन किया जाता है। कीर्तन मंडली विभिन्न इलाकों में जाकर भगवान श्रीकृष्ण के नाम का प्रचार-प्रसार करती है और लोगों को भक्ति से जोड़ने का कार्य करती है।
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Reviewed by Bengal Media
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May 16, 2026
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