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चार दशक की वकालत का सम्मान, वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष कांति गोस्वामी बने पश्चिम बर्धमान के लोक अभियोजक

आसनसोल-: पश्चिम बर्धमान के विधिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण घटनाक्रम में जिले के वरिष्ठ एवं अत्यंत अनुभवी अधिवक्ता पीयूष कांति गोस्वामी को पश्चिम बर्धमान के सदर न्यायालय, आसनसोल के लोक अभियोजक (Public Prosecutor) के पद पर नियुक्त किया गया है।
उनकी नियुक्ति पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा अधिसूचना संख्या 3385-C/LR/PA/12/2026 दिनांक 4 अगस्त 2026 के माध्यम से की गई है। उक्त अधिसूचना को 11 अगस्त 2026 को जिला न्यायाधीश, पश्चिम बर्धमान के कार्यालय द्वारा औपचारिक रूप से विभिन्न न्यायालयों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं संबंधित संस्थानों को प्रेषित किया गया।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि सदर न्यायालय, आसनसोल के लिए जारी अभियोजन पैनल में पीयूष कांति गोस्वामी का नाम प्रथम स्थान पर दर्ज करते हुए उन्हें स्पष्ट रूप से “Public Prosecutor” की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि अन्य अधिवक्ताओं को Panel Public Prosecutor के रूप में नियुक्त किया गया है।
उनकी यह नियुक्ति वर्ष 1983 से चली आ रही चार दशकों से अधिक लंबी, सक्रिय और प्रतिष्ठित वकालत यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
पीयूष कांति गोस्वामी ने वर्ष 1983 में विधि व्यवसाय की शुरुआत की थी। इसके बाद पिछले चार दशकों से अधिक समय में उन्होंने आपराधिक, दीवानी, वाणिज्यिक, संपत्ति, सरकारी एवं अन्य जटिल मामलों में व्यापक अनुभव अर्जित किया।
न्यायालयीन कार्य के प्रति उनकी दीर्घकालीन प्रतिबद्धता ने उन्हें पश्चिम बर्धमान की उस वरिष्ठ पीढ़ी के अधिवक्ताओं में स्थान दिलाया है, जिन्होंने बदलते कानूनों, न्यायिक व्यवस्थाओं और अलग-अलग दौर की मुकदमेबाजी को बेहद करीब से देखा और समझा है।
उनकी पहचान केवल एक आपराधिक अधिवक्ता या दीवानी अधिवक्ता तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने अपने लंबे पेशेवर जीवन में लगभग प्रत्येक प्रमुख प्रकार की न्यायिक कार्यवाही में सक्रिय भूमिका निभाई है।
कोर्टरूम एडवोकेसी, तथ्यात्मक विश्लेषण, व्यावहारिक कानूनी समझ और दशकों के अनुभव के कारण उनकी गिनती जिले के अनुभवी अधिवक्ताओं में की जाती है।
पीयूष कांति गोस्वामी ने अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी.एससी. की डिग्री प्राप्त कर पूरी की।
इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित सुरेन्द्रनाथ लॉ कॉलेज, जो कलकत्ता विश्वविद्यालय के अधीन है, से एल.एल.बी. की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 1983 में विधि व्यवसाय में प्रवेश किया।
उनकी वकालत ऐसे दौर में प्रारंभ हुई जब कोर्टरूम प्रशिक्षण, वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चैंबर में प्रत्यक्ष अनुभव और नियमित न्यायालयीन अभ्यास को वकालत की सबसे मजबूत नींव माना जाता था।
वे पिछले कई वर्षों से भारत सरकार के अतिरिक्त स्थायी सरकारी अधिवक्ता (Additional Standing Government Counsel, Government of India) के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
सरकार का न्यायालय में प्रतिनिधित्व करना केवल कानूनी ज्ञान का विषय नहीं होता, बल्कि इसमें संस्थागत जिम्मेदारी, प्रशासनिक समझ, सार्वजनिक हित और अत्यंत सावधानीपूर्वक कानूनी निर्णय क्षमता की आवश्यकता होती है।
अब पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उन्हें लोक अभियोजक की जिम्मेदारी सौंपे जाने से उनके लंबे सरकारी विधिक अनुभव में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
पीयूष कांति गोस्वामी की चार दशक लंबी वकालत का एक विशेष और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण पक्ष उनका अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय, विशेषकर आदिवासी समाज के लोगों को कानूनी सहायता प्रदान करना रहा है।
पश्चिम बर्धमान और आसपास का क्षेत्र औद्योगिक, खनन एवं भूमि संबंधी विवादों के लिए जाना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में गरीब और आदिवासी परिवारों की जमीन पर अवैध कब्जे, अनधिकृत हस्तांतरण अथवा प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा भूमि हड़पने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
ऐसे अनेक मामलों में गोस्वामी ने आदिवासी एवं कमजोर वर्ग के लोगों को कानूनी सहायता प्रदान की और उनकी जमीन एवं वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालयों और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उनकी आवाज उठाई।
इसी कारण उनकी पहचान केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे वकील के रूप में भी बनी है जिसने अपने पेशेवर जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के प्रयासों में लगाया।
उनका यह योगदान उन्हें परंपरागत वकालत की सीमाओं से आगे एक सामाजिक सरोकार रखने वाले विधि व्यवसायी के रूप में स्थापित करता है।
लोक अभियोजक का पद आपराधिक न्याय प्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। लोक अभियोजक केवल राज्य सरकार की ओर से मुकदमा लड़ने वाला अधिवक्ता नहीं होता, बल्कि न्यायालय के समक्ष निष्पक्ष एवं न्यायपूर्ण तरीके से अभियोजन प्रस्तुत करने की संवैधानिक और संस्थागत जिम्मेदारी भी निभाता है।
ऐसे में वर्ष 1983 से सक्रिय, चार दशक से अधिक का न्यायालयीन अनुभव रखने वाले, भारत सरकार के लिए लंबे समय से सरकारी अधिवक्ता के रूप में कार्यरत और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को कानूनी सहायता देने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता को यह जिम्मेदारी सौंपा जाना विधिक जगत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पीयूष कांति गोस्वामी की नियुक्ति को पश्चिम बर्धमान की विधिक बिरादरी में भी एक उल्लेखनीय घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। चार दशकों से अधिक समय तक निरंतर न्यायालयीन अभ्यास करने वाले अधिवक्ता को जिले के सदर न्यायालय में राज्य के प्रमुख अभियोजन दायित्व की जिम्मेदारी मिलना स्वयं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
1983 में वकालत की शुरुआत से लेकर आपराधिक, दीवानी और वाणिज्यिक मामलों में व्यापक अनुभव अर्जित करने, भारत सरकार के अतिरिक्त स्थायी सरकारी अधिवक्ता के रूप में सेवा देने, आदिवासी एवं वंचित समाज के कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने और अब पश्चिम बर्धमान के लोक अभियोजक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा चार दशकों की निरंतर विधि साधना का परिणाम है।
उनकी यह नियुक्ति केवल एक नया सरकारी पद नहीं, बल्कि लंबे न्यायालयीन अनुभव, सार्वजनिक सेवा, सामाजिक प्रतिबद्धता और विधि व्यवसाय के प्रति आजीवन समर्पण को मिली एक महत्वपूर्ण संस्थागत मान्यता के रूप में देखी जा रही है।
चार दशक की वकालत का सम्मान, वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष कांति गोस्वामी बने पश्चिम बर्धमान के लोक अभियोजक चार दशक की वकालत का सम्मान, वरिष्ठ अधिवक्ता पीयूष कांति गोस्वामी बने पश्चिम बर्धमान के लोक अभियोजक Reviewed by Bengal Media on August 12, 2026 Rating: 5

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